February 8, 2026
Articles

“हमारा देश एक है”: सुप्रीम कोर्ट

सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली में केरल छात्रों पर नस्ली हमले की कड़ी निंदा की (2025)

भारत की संवैधानिक पहचान विविधता, सह-अस्तित्व और सांस्कृतिक सम्मान पर आधारित है।
सितंबर 2025 में जब दिल्ली के लाल किला क्षेत्र में दो केरल छात्रों पर हमला हुआ—और उन्हें हिंदी बोलने के लिए मजबूर किया गया तथा लुंगी पहनने पर मज़ाक उड़ाया गया—तब यह केवल एक आपराधिक घटना नहीं थी, बल्कि भारत की बहुलवादी आत्मा पर एक चोट थी।

सुप्रीम कोर्ट की प्रतिक्रिया तत्काल, संवेदनशील, और ऐतिहासिक थी। कोर्ट ने दोहराया कि भाषा, वेशभूषा या सांस्कृतिक पहचान के आधार पर होने वाला भेदभाव स्वीकार्य नहीं है।


घटना: भाषा और संस्कृति के आधार पर हमला

सितंबर 2025 की यह घटना सामने आई जब दो केरल छात्र:

  • झूठे चोरी के आरोप में फंसाए गए
  • हमलावरों के समूह द्वारा पीटे गए
  • हिंदी बोलने के लिए मजबूर किए गए
  • उनकी पारंपरिक पोशाक लुंगी का मज़ाक उड़ाया गया
  • उनके सांस्कृतिक अस्तित्व का अपमान किया गया

यह हमला केवल शारीरिक नहीं, बल्कि उनकी पहचान पर मानसिक हिंसा थी।

इसने कई गंभीर सवाल उठाए:

  • गैर-हिंदी भाषी नागरिकों की सुरक्षा
  • महानगरों में बढ़ती सांस्कृतिक असहिष्णुता
  • नस्ली प्रोफाइलिंग का बढ़ता चलन
  • गरिमा के अधिकार (अनुच्छेद 21) का उल्लंघन

सुप्रीम कोर्ट ने लिया स्वत: संज्ञान (Suo Motu)

न्यायमूर्ति संजय कुमार और न्यायमूर्ति आलोक आराधे की पीठ ने मीडिया रिपोर्ट्स का संज्ञान लेते हुए स्वत: संज्ञान लिया।

कोर्ट ने व्यक्त किया:

  • गहरी चिंता
  • पीड़ा
  • rising intolerance पर चिंता

पीठ ने भावनात्मक स्वर में कहा:

“हमारा देश एक है।”

यह कथन केवल एक संदेश नहीं था — it was a reaffirmation that India’s strength lies in unity in diversity.


सुप्रीम कोर्ट की मुख्य टिप्पणियाँ

1. नस्ली और सांस्कृतिक हिंसा पूरी तरह अस्वीकार्य
कोर्ट ने साफ कहा कि ऐसे कृत्य:

  • संवैधानिक मूल्यों
  • मानव गरिमा
  • भारतीय बहुलवाद के विरुद्ध हैं।

2. मूल अधिकारों का उल्लंघन
हमला निम्नलिखित अधिकारों का हनन है:

  • 🟦 अनुच्छेद 14 – समानता
  • 🟩 अनुच्छेद 15 – जन्मस्थान/जातीय आधार पर भेदभाव निषेध
  • 🟧 अनुच्छेद 19 – वेशभूषा/भाषा की स्वतंत्रता
  • 🟥 अनुच्छेद 21 – गरिमा का अधिकार

3. हेट क्राइम को रोकना राष्ट्रीय जिम्मेदारी
कोर्ट ने कहा कि भारत को नस्ली और सांस्कृतिक हिंसा पर ठोस और त्वरित कदम उठाने होंगे।


कोर्ट के निर्देश: सामाजिक सुरक्षा की दिशा में बड़ा कदम

🔹 1. नस्ली हिंसा पर निगरानी समिति का गठन

केंद्र सरकार को एक उच्चस्तरीय समिति बनानी होगी जो:

  • नस्ली और सांस्कृतिक हमलों की निगरानी करे
  • रोकथाम के उपाय सुझाए
  • नीति सुधारों की सिफारिश करे
  • राज्यों को समन्वित सुरक्षा उपाय प्रस्तावित करे

🔹 2. रिपोर्टिंग और डेटा सिस्टम मजबूत करना

कोर्ट ने सुझाव दिया:

  • राष्ट्रीय स्तर की हेल्पलाइन
  • हेट क्राइम का केंद्रीय डेटाबेस
  • त्वरित जांच प्रणाली

🔹 3. जागरूकता और संवेदनशीलता कार्यक्रम

स्कूलों, कॉलेजों और पुलिस अधिकारियों के लिए:

  • सांस्कृतिक संवेदनशीलता प्रशिक्षण
  • मानवाधिकार शिक्षा
  • भेदभाव विरोधी कार्यक्रम

यह मामला क्यों महत्वपूर्ण है?

1. भाषाई एवं सांस्कृतिक अल्पसंख्यकों पर बढ़ते हमले

मेट्रो शहरों में अन्य राज्यों के लोग असुरक्षित महसूस करते हैं।

2. हेट क्राइम पर विशेष कानून की कमी

भारत में अभी भी हेट क्राइम के लिए स्पष्ट समर्पित कानून नहीं है।

3. बेहतर केंद्र–राज्य समन्वय की जरूरत

ऐसी घटनाएँ एक संयुक्त राष्ट्रीय नीति की मांग करती हैं।

4. दक्षिण भारतीय, उत्तर-पूर्वी एवं जनजातीय समुदायों की सुरक्षा

इन समुदायों पर हमले एक व्यापक पैटर्न की ओर इशारा करते हैं।


कानून के छात्रों, वकीलों और नीति-निर्माताओं के लिए प्रमुख सबक

✔ संविधानिक सिद्धांतों की पुनर्पुष्टि

  • समानता
  • गरिमा
  • सांस्कृतिक अधिकार
  • भेदभाव विरोध

✔ न्यायपालिका की भूमिका

सुप्रीम कोर्ट ने दिखाया कि वह भारत की सांस्कृतिक विविधता का संरक्षक है।

✔ भविष्य में हेट क्राइम कानून की संभावना

यह मामला व्यापक कानून के निर्माण का आधार बन सकता है।


निष्कर्ष — भारत की एकता का पुनर्पुष्ट संदेश

सुप्रीम कोर्ट का वक्तव्य “हमारा देश एक है” केवल कानून नहीं, बल्कि भारत की आत्मा की रक्षा का आह्वान है।“हमारा देश एक है”: सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली में केरल छात्रों पर नस्ली हमले की कड़ी निंदा की (2025) 🇮🇳

भारत की संवैधानिक पहचान विविधता, सह-अस्तित्व और सांस्कृतिक सम्मान पर आधारित है।
सितंबर 2025 में जब दिल्ली के लाल किला क्षेत्र में दो केरल छात्रों पर हमला हुआ—और उन्हें हिंदी बोलने के लिए मजबूर किया गया तथा लुंगी पहनने पर मज़ाक उड़ाया गया—तब यह केवल एक आपराधिक घटना नहीं थी, बल्कि भारत की बहुलवादी आत्मा पर एक चोट थी।

सुप्रीम कोर्ट की प्रतिक्रिया तत्काल, संवेदनशील, और ऐतिहासिक थी। कोर्ट ने दोहराया कि भाषा, वेशभूषा या सांस्कृतिक पहचान के आधार पर होने वाला भेदभाव स्वीकार्य नहीं है।


Related posts

Judicial Power in Balance: Activism or Legislation?

Saumya Mishra

Female as Karta answer writing

Tabassum Jahan

Indian Legal Essentials: Bare Acts Unveiled

Dharamvir S Bainda

Leave a Comment